इस लोक की अनंतता में ही उसकी समग्रता है। शून्य ख़ुद में पूरा है — ख़ुद मूल्यवान भी है, मूल्यहीन भी वही है। शून्य “०” अनंत भी है — उसके अंदर भी एक पूरी दुनिया है, उसके बाहर भी एक पूर्ण ब्रह्मांड बसता है। कल्पना के परे भी कोई दुनिया है, या हो सकती है, इससे शायद ही कोई तार्किक प्राणी एतराज रखेगा। एक बेहतर और बदतर दुनिया की कल्पना शुरुवात से हमारे साथ चलती आ रही है। आज भी साथ है, आगे भी अपना साथ निभाते ही जाएगी।
Push A Little
थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ता है
I am Time
सूरज, गुलाब और हवा
वक़्त हूँ मैं
सॉफ्टवेयर इंजीनियर का इस्तीफा
Sun, Rose and Wind
My trip to salvation
क़िस्मत
Pagination
- Previous page
- Page 2
- Next page
Podcasts
Audio file
Pagination
- Previous page
- Page 2
- Next page