मेरी आर्थिक समस्यायें
जीवन का अर्थ तो आनंद की मात्रा और उसकी गुणवत्ता ही तय करती है। आनंद तो ज्ञान के रास्ते ही मिल सकता है। यह रास्ता किसी के लिए निर्धारित नहीं है, यहीं हम अपने इच्छा-स्वातंत्र्य का प्रयोग करते हैं। यही चुनाव हमारे जीवन के अर्थों का मापदंड है। राम और रावण दोनों ही ज्ञानी थे, उनमें अंतर तो आनंद का ही था। रावण में जो महत्त्वाभिलाषा थी, भोग-विलास की जो लोलुपता थी, उसकी जो शारीरिक हवस थी, जिसके लिए उन्होंने सीता का अपहरण किया था, वह उस ज्ञानी को अभिमानी बना देती है। रावण हमारे अहंकार और घमंड का प्रतीक है। राम अपनी मर्यादा के लिए जाने जाते हैं। उनमें ईमानदारी है, आत्मसम्मान है, स्वाभिमान है। राम और रावण दोनों ही हमारे अंदर हैं, हमें तो बस हर पल चुनाव करना है। यही चुनाव हमारे अस्तित्व को हर क्षण अर्थ देता है। एक पल में जो राम थे, वही अगले क्षण रावण का किरदार निभा सकते हैं।