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Submitted by admin on

लोग मर जाते हैं,
उनका एक काम है मरना,
मर जाने से शरीर मरता है,
मन में तो गांधी और गोडसे,
दोनों ही ज़िंदा बच जाते हैं!
लोगों के मर जाने पर,
अफ़सोस क्यों जताना?
हमें तो उनका जीवन बताना चाहिए,
उनकी कहानी सुननी-सुनानी चाहिए,
आख़िर ये कहानियाँ ही तो स्वराज के प्रमाण हैं,
साहित्य नहीं तो बताओ तो जीवन और कहाँ बसता है?
लोग और कहाँ अमर हो सकते हैं?
जन्नत का विज्ञान से क्या वास्ता?
मोक्ष तो भावनाओं में पलता है,
स्वर्ग कल्पनाओं में फलता- फूलता है,
जीवन के पक्ष में जो अवधारणा है,
वही तो लोकतंत्र कहलाती है।

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